जून 1 9 9 4 में दिल्लीसे हम लोगएक बस परबद्रीनाथ और केदारनाथधामों की परचले । बसपर कुल 2 8 यात्रीथे । बसपहले केदारनाथ केमार्ग चली औरगौरीकुंड जो सड़कमार्ग का अंतिमपड़ाव है पररुक गई | सभीयात्री उतरकर गौरीकुंड मेंस्नान और जलपानकर केदारनाथ धामकी यात्रा परचल पड़े । बहुत सारे यात्रियोंने गौरीकुंड सेही घोडा लियाऔर बाद मेंकेवल दो जनोंको छोड़ करशेष सभी नेआधे रास्ते सेघोड़े कीसवारी कर लीथी । दोमें एक मैंऔर दूसरी मेरीधरमपत्नी थी जिन्होंनेआग्रह किया थाकी शिवजी केधाम की पैदलही यात्रा करेंगें। श्रद्धा केसामने मैं नतमस्तकथा । दोनोंकी उम्र 5 0 सेअधिक थी ।सभी सह -यात्रीघोड़ों पर आगेबड गए थे, फिर मैंने भीअपनी पत्नी कीआस्था पर चोटपहुँचाना उचित नहींसमझा । दुर्गम चढ़ाई केकारण हमदोनों काफी थकगए थे ।बारिश भी होरही थी ।गुप्प अँधेरा थान कोई यात्रीआगे दिखाई देताथा और नही कोई पीछेदिखाई देता था। हम दोनोंदो या तीनमिनट से अधिकनहीं चल पारहे थे ।चलते चलते बैठजाते फिर उठकर आगे बड़नेकी चेष्टा करतेथे । धरमपत्नी का हाथपकड़ा तो एकहाथ एकदम ठंडातो दूसरा एकदमगर्म था ।शिवजी का नामलेते लेते 8 बजेरात में हमलोग केदारनाथ धामपहुंचे । वहां हमारे सभी सह-यात्री भोजन कररहे थे औरहम दोनों केलिए चिंतित थे। बारिश मेंहमदोनो बिलकुल भींग चुकेथे । कमरेमें पहुँच करहमने अपने अपनेकपडे बदले ।मुझे बुखार चढ़चूका था , मैंभोजन के लिएनहीं जा सकातो मेरी धरमपतनीने भी उपवासरख लिया था। रात मैंमेरी तबियत चिंताजनकहो गई थीतभी सुनने मैंआया की हमलोगों का ग्रुपलीडर जो अभीअभी अपने नौकरीसे रिटायर कियाथा भोजन करतेकरते सबसे बातेंकरते करते अचानकगिर कर बेहोशहो गया था। कुछ घंटों के बादखबर आई कीडॉक्टर हमारे लीडर कोबचा नहीं सकीऔर हार्ट -अटैकके कारण वेचल बसे ।उनके साथ उनकीपत्नी और बूढ़ीमाँ भी थी। उन दोनोंने आग्रह कियाकी शव कोदिल्ली ले जायाजाये ।और यह निश्चयहुआ की सभीप्रातः 6 बजे केदारनाथधाम छोड़ देंगें। मैं प्रातःकाल उठा तोमेरा बुखार उतरचूका था ।कमरे से बाहरआया तो देखाधरमपत्नी इतनी ठंडीमें सड़क केनल से ठंडेपानी से स्नानकर रही थी। गौरीकुंड सेहमलोंगो के साथएक पंडा भीआया था ।उनको देख करमैंने कहा की "शिवजीका दर्शन नहींहो सकता हैक्या ? " यह सुनतेही पंडा बहुतबिगड़ गया औरबोला “हम लोगतो शव कोदिल्ली भेजने के प्रबंधमें लगे हुएहैं और अगरअभी आप लोगदर्शन की पंक्तिमें भी बैठजाते हो तोभी आपकी बारीतो 2 बजे सेपहले नहीं आएगी। और फिरआप सभी कोअभी एक घन्टेमें यहाँ सेरवाना भी होनाहै । " पंडा ठीक हीबोल रहा था। मैंने सोचाकी केदारनाथ मंदिरके द्वार परही माथा टेक आऊं। मंदिर गयातो वह अभीखुला भी नहीथा । दर्शनार्थीसर्प की कुंडलीके आकर मेंसटे सटे बैठेथे । द्वारतक जाना भीसंभव नहीं था, क्योंकि दर्शनार्थी की कईकई पंक्तियाँ बैठीहुई थी ।खड़े खड़े हाथजोड़ कर शिवजी को प्रणामकिया और लौटचला । मंदिर के प्रांगणसे उतरा हीथा की देखामेरी धरमपत्नी स्नानकर शिवजी केलिए घर सेजो यज्ञोपवित, अगरबत्तीऔर अन्य पूजन-सामग्री लाइ थीहाथ में लेकरशिव जी काजप करते करतेआ रही थी। मैंने जोकुछ देखा उसेबता दिया औरकहा की केदारनाथदर्शन तो असम्भवहै | मेरे कथन कीकोई भी प्रतिक्रियाउसके ऊपर नहींहुई । मंदिरके प्रांगण मेंपहुंचकर वह एककोने में खड़ेहोकर अचानक विह्वलहोकर रोने लगीऔर कहने लगी " बाबा!!! क्या हम लोगइतने पापी हैंकी यहाँ तकपहुँच कर बिनाआपके दर्शन कियेलौट जायेंगें ? " सामने से एकदस-बारह वर्षका लड़का आया। मुझे लगाकी वह मंदिरका ही कोईकर्मचारी होगा ।दिल्ली से चलतेसमय मित्रों औरसम्बन्धियों ने शिवजीके चढ़ावे केरूप में रूपएदिए थे ।मैंने सारे रूपएऔर पत्नी केहाथों में जोपूजा की सामग्रीथे लेकर उसलड़के को देतेहुए कहा की" हम लोग दिल्लीसे आये हैं, हम लोगों केग्रुप-लीडर कीगत रात मृत्युहो चुकी है, कृपया सामग्री औररूपए आप अपनीसुविधानुसार बाबा कोचढ़ा देना , क्योकिहम लोगों कोअभी तुरंत वापसलौटना है ।" उस लड़के नेसामान नही लियाऔर कहा आपलोग सीधे मेरे साथनीचे आइये। वह हमेंमंदिर कमिटी केसदस्य के पासले गया ।सदस्य ने कहाकी आप लोगदर्शन नहीं करसकते हैं क्योकि " छुतक" हो गया है। मैंने उन्हेंकहा की मैंबिहार का मैथिलब्राह्मण हूँ औरजिनकी मृत्यु हुईहै वे पंजाबीखत्री थे , इसलिएछुतक लागू नहींहोता है । सदस्य ने हमदोनों को 5 मिनटरुकने के लिएकहा और फिरहम दोनों कोको लेकर चला। इसी बीचउस बालक नेशिवजी को चढ़ानेके लिए प्रसादकी व्यवस्था करदी थी ।दर्शनार्थी के सरोंको टापते हुएहम लोग जारहे थे । मुख्य द्वार अभी तकनहीं खुला था। एक दुसरेद्वार के समीपहमें कमिटी कासदस्य ले गया, धरमपत्नी तो मंदिरके अन्दर प्रविष्टकर गई लेकिनवह मेरा हाथमजुबुती से पकड़ीहुई थी ।मुझे द्वार परपंडों ने रोकलिया था ।लेकिन धरमपत्नी केहाथ पकडे रहनेके कारण मुझे भीउन लोगों कोअन्दर जाने देनापड़ा । मंदिर के अन्दरजाने पर देखातो पाया कीएक पंक्ति मेंकरीब 5 0 भक्त थालियोंमें धूप -दीप, पूजन सामग्री लेकर खड़ेहुए थे ।वे सब शायदVIP लोग या मोटी रकमदान मेंदिए लोग थे। सभी पूजाप्रारंभ होने परअपनी अपनी बारी काइन्तजार कर रहेथे । पत्नी उस पंक्तिमें न लगकर उनके लौटनेवाले रास्ते सेआगे बढ़ गईऔर सीधे पुजारीजी केपास जाकर बैठगई । जोइन VIP लोगों के लिएपूजा प्रारंभ करवानेवाले थे ।वहां केवल ॐनमः शिवाय काजाप चल रहाथा । मन्त्रछोड़ कर कोईकुछ भी नहीबोल रहा था । पत्नी ने एक-एक कर यज्ञोपवित, अगरबत्ती औरअन्य पूजन सामग्रीबाबा को श्रद्धाभाव से अर्पितकिया । शिवजी के शरीरसे चन्दन लेकरउन्होंने हम दोनोंके माथे परटीका लगाया। दोनों शिवजी का भाव-विभोर होकर दर्शनकर रहे थे। कोई हमें कुछनहीं कह रहाथा .... कि हमलोग वहां सेहट जाएँ , क्योकिपंक्ति में खड़ेलोग जिनके लिएअभी पूजा प्रारंभकरनी थी शायदयही सोच रहेथे की यहजोड़ा बिना पंक्तिका सर्व प्रथमपूजा का अधिकारीबना है अवश्यही कोई ख्यातिप्राप्त VVIP होगा । फिर आपने आपहम दोनों उठेऔर वापस लौटे। हमारे साथ केसभी सह-यात्रीलौट चुके थे। ऐसे दर्शनका लाभ तोबिरलों को भीनसीब होता है। हम दोनों नेभी घोड़ों कीसवारी की औरअति शीघ्र गौरीकुंडपहुँचकर उसीबस से वापसदिल्ली लौट आये। मैंने अपनी धरमपत्नीसे पूछा कीवह मंदिर केअन्दर पंक्ति मेंक्यों नहीं लगीथी , तो उसनेजबाब दिया कीविह्वल होकर शंकाकरने के बादउसे कुछ भीहोश नहीं था।और शंका का समाधान कर मदिर के द्वार से न लौटाने वाला वह बालक शिवजी को छोड़ कर दूसरा कोई नही हो सकता | शिवके दर्शन करनेके बादही उसकी चेतनापुनः जागृत हुई। अपनी धरमपत्नी की श्रद्धाऔर विश्वास केसमक्ष मैं नतमस्तकथा । द्वारा जनमेजय मिश्र
Your health is affected by zodiacal, planetary and stellar influences. Each sign of zodiac represents a certain part of human anatomy and the specific disease peculiar to it.Aries:- Head, pituitary, cerebrum, cerebellum, facial bones, upper jaw
- Wounds, fevers, short temperedness, diseases of impure blood, inflammatory disorders, sleeping sickness, headache, pyorrhoea, insomnia eye trouble.
Taurus:- Neck, gullet, throat, bones of neck, ears, thyroid gland, lower jaw
- Goitre [swelling in neck], weak venous system, obesity
Gemini: - Skin, respiratory canal, lungs, nervous system, bones of shoulder, collar arms and hands, upper ribs
- Tuberculosis, pneumonia, asthma, nervous tension, gout
Cancer:- Breast, chest, heart, stomach, digestive organs, epigastric region
- Cancer, smallpox, dropsy, constant mental maladies,
Leo: - Spine, back, pancreas, liver, heart
- Heart, stomach, blood, and spine diseases, Diabetes, low stamina and will power, fainting
Virgo: - Abdominal umbilical region, intestines and bowel
- Appendicitis, constipation, nervous breakdown, masturbation, venereal diseases
Libra:- Skin, kidneys, lumber region, ovaries, sperm ducts, uriters, epidermis
- Gout, arthritis, venereal diseases, diabetes, renal stones, Bright's disease, nephritis
Scorpio:- Urinary system, sexual organs, anus, bladder, nasal organs, pelvic bone, colon
- Piles, boils, urinary tract infection, ulcers, and nervous troubles
Sagittarius:- Hips, arterial system, thighs, nerves
- Anaemia, jaundice, cold, diabetes, high fever, poor digestion, gout, paralysis, fits
Capricorn:- Bones, knees, joints, hair, nails
- Eye, throat, teeth diseases, joint pains, leprosy, leucoderma, elephant feet
Aquarius:- Legs, ankles, blood circulation
- Cancerous disease, leg fractures, nervous diseases
Pisces:- Bones of feet and toes, lymphatic system
- Gout, joint pains, tumours, excess of mucous, tuberculosis
BY GEETA JHA [SPIRITUAL HEALER]INDIA
गर्भपात के विषय में वाद-विवाद लंबे समय से है | बहस का स्वरुप अधिकतर निजी - स्वार्थ , धार्मिक - प्रकृति, नैतिक - मकसद और दार्शनिक - पहलूओं के मध्य झूलता रहता है । मानवाधिकार के तहद हर मानव को जीने का अधिकार है। गर्भ से बाहर आने के बाद भारत में पालन करने के लिए कई कानून हैं , लेकिन गर्भ के अन्दर भ्रूण हत्या के लए कोई कठोर कानून नहीं है। गर्भस्थ शिशु पुकार नहीं सकता अपने बचाव के लिए चिल्ला नहीं सकता इसलिए उसकी हत्या करने पर सम्बंधित लोगों में अपराध की भावना भी जागृत नहीं होती है।
नेशनल राईट तो लाइफ के अनुसार विश्व में केवल 7 % गर्भ पात ही बलात्कार या चिकित्सा कारणों से होते हैं, जबकि 93 % गर्भ -पात केवल सुविधा , सहूलियत और सामाजिक कारणों के कारण होते हैं।
अल्ट्रा- साउंड इमेजिंग उपकरण का विकास गर्भस्थ शिशु की रक्षा हेतु जाँच के लिए हुआ था, ताकि यदि गर्भस्थ शिशु का उचित विकास न हुआ हो तो , उसका उपचार गर्भ में ही किया जा सके।परन्तु आज कल अधिकतर इस तकनीक का प्रयोग लिंग -परीक्षण के लिए किया जाता है। ऐसे परिक्षण में अगर अगर पता चलता है की भ्रूण मादा हैं तो उसका अस्तित्व खतरे में पड़ जाता है।उसे जन्मने से पहले ही मृत्यु के हवाले कर दिया जाता है।भ्रूण एक स्वतंत्र जीवित इकाई है गर्भ-पात के समर्थक कहते हैं की भ्रूण अपनी माँ के लाइफ सपोर्ट सिस्टम के ऊपर पूर्ण रूप से आश्रित रहता हैं, माँ के गर्भ के बाहर उसका जीवन संभव नहीं है अतः गर्भ के अन्दर उसको एक पूर्ण-जीवित-इकाई मानना उचित नहीं है।
उनकी यह दलील उचित नहीं है क्योकि कोमा में जाने वाले व्यक्ति एवं मधुमय, किडनी-फेलियर या अन्य बिमारियों से ग्रसित लोग भी काफी लम्बे समय तक जीवन-समर्थित -सिस्टम पर जिन्दा रहते हैं, तो क्या उनके जीने का अधिकार समाप्त हो जाता है? या उन्हें एक पूर्ण-जीवित-इकाई नहीं माना जाता है?क्या गर्भ- पात से गर्भस्थ शिशु को पीड़ा होती है ? गर्भ-पात के हिमायतियों का कहना है प्रारंभिक अवस्था में भ्रूण के मस्तिष्क का सेरिब्रल-कोर्टेक्स विकसित नहीं होता ही, अतः उन्हें गर्भ-पात से उत्पन्न हुई शरीरिक पीड़ा का अनुभव नहीं होता है।विज्ञान ने अनेक परिक्षण-अन्वेषण-अनुसन्धान कर यह सिद्ध किया है की शरीरिक पीड़ा अनुभव करने के लिए मस्तिष्क के थाल्मस का होना ही प्रयाप्त है, जो भ्रूण के 8 वे हफ्ते में पूर्ण विकसित हो जाता है।गर्भवस्था के 6 वे हफ्ते में भ्रूण के मस्तिष्क की तरंगों को मापा जा सकता है।प्रत्येक शरीर के अंग बनाने शुरू हो जाते हैं, तथा ऊँगली के छाप तैयार हो जाते हैं।6-8 हफ्ते में भ्रूण की नाड़ी -संस्थान संरचना उपस्थित होती है। किसी भी शरीरिक प्रतिक्रिया को अनुभव करने के लिए मुख्यत तीन अवयवों की आवश्कता पड़ती है :1. संवेदन नाड़ी तंत्र [sympathetic nervous system] जो दर्द का अनुभव करती है और उसे सन्देश के रूप में मस्तिष्क को भेजती है।2.मस्तिष्क के आधार में स्थित थाल्मस जो सन्देश को ग्रहण करता है।3. मोटर नाडी जो सम्बंधित अंग को सन्देश भेजती है।ये तीनों अवयव 8 हफ्ते के भ्रूण में उपस्थित रहते हैं। वैज्ञानिकों ने देखा की 8 हफ्ते के भ्रूण के पैरों के तलवों में अगर कोई नुकीली या पैनी वस्तु चुभो दी जाये तो वह न केवल अपना पैर खीच लेता है वरन उसके चहरे पर पीड़ा की अनुभूति के भाव की साफ झलक होती है। इतना ही नहीं उसकी ह्रदय-गति में परिवर्तन आ जाता है और वह गर्भ में अपनी स्तिथि को बदल लेता है ।अल्ट्रा -साउंड के माध्यम से भ्रूण का E C G एवं E E G का परिक्षण क्या गया तो पाया गया की बाहरी प्रतिक्रिया के प्रति भ्रूण की प्रतिक्रिया संवेदना से भरी होती है।भ्रूण-शास्त्र के जन्मदाता सर विलियम लिल्ली के अनुसार गर्भस्थ भ्रूण न केवल स्पर्श,पीड़ा,ध्वनि के प्रति सम्वेदनशील होता हैं वरन गर्भ में प्रकाश की इंटेंसिटी घटने-बड़ने और amniotic fluid के तापमान और स्वाद में परिवर्तन के प्रति भी प्रतिक्रिया करता है।गर्भपात की अमानवीय प्रक्रियाएं 12 हफ्ते के भ्रूण के अल्ट्रासाउंड विडियो के साफ दिखाई देता है की गर्भ-पात में प्रयोग में ली जाने वाली सेक्शन-डिवाइस [Vacuum Aspiration Abortion ] से बचने के लिए भ्रूण पूरी कोशिश करता है। इसके फलस्वरूप उसकी ह्रदय-गति दो गुनी हो जाती है। सक्शन डिवाइस में तेज धार वाले कट्टर लगे होते हैं जिसे भ्रूण के कोमल सर पर निर्ममता से छेद कर उसके मस्तिष्क के द्रव को बहार निकाल दिया जाता है , तीब्र वेदना से अपना बचाव करने के लिए भ्रूण का मूंह वेदना में खुल जाता है जिसे मूक चीख [ silent scream ] भी कहा जाता है। शीघ्र ही उसके शरीर की कोमल त्वचा उतर जाती है, गर्भ से जुड़े रहने का प्रमुख आधार प्लेसेंटा, amniotic fluid एवं भ्रूण के बचे हुए शेष भाग कलेक्शन ट्यूब में आकर जमा हो जाते है।
यह पूरी प्रक्रिया अमानवीय है। जिस डॉक्टर ने सर्वप्रथम अल्ट्रासाउंड विडियो टेप देखा था उसने भविष्य में कभी गर्भपात नहीं करने का फैसला किया था।दुसरे प्रकार D N C [ Dilation and Curettage Abortion ] प्रक्रिया भी लूप आकर की स्टील की तेज धार वाली नाइफ़ से भ्रूण के टुकड़े-टुकड़े कर प्लेसेंटा और क्षत-विक्षत भ्रूण को निकाल कर गर्भाश्य की दीवारों को खरोंच कर साफ़ किया जाता है।
गर्भावस्था के पहले और दूसरे ट्राइमेस्टार में डॉक्टर्स एबॉर्शन के लिए मेडीकल एबॉर्शन की सलाह देते हैं। जिसमें दवाओं के प्रयोग से एबॉर्शन किया जाता हैं। इसे कैमिकल एबॉर्शन के नाम से भी जाना जाता है। इस में मुख्यता proglastin नामक ड्रग समूह की दवाइयों का प्रयोग किया जाता है । इनके प्रयोग से गर्भाश्य में तीव्र संकुचन होता है जिसके चलते गर्भाश्य की आन्तरिक दीवार की लाइनिंग और उसपर निषेचित भ्रूण और अन्य टिश्यू योनि मार्ग से बाहर आ जाते हैं । कभी कभी इस प्रक्रिया में बाहर आने वाले भ्रूण जीवित अवस्था में भी होते हैं ।
1996 में अमेरिका कांग्रेस द्वारा बहस में गर्भपात के पक्ष में दलील देने वालों ने कहा था की गर्भ-पात में प्रयुक्त एनेस्थेसिया के चलते भ्रूण गर्भपात से पहले ही दम-तोड़ देता है।लेकिन U .S. Society for Obstetric Anesthesia and Perinatology [SOAP] के उच्च अधिकारीयों के अनुसार जिस एनेस्थीसिया से माँ के शरीर पर कोई नकारत्मक प्रभाव नहीं पड़ता है उससे भ्रूण को क्या नुकसान हो सकता है ?ब्रिटिश मेडिकल जेर्नल लांसेंट ने भ्रूण द्वारा अनुभव की गई पीड़ा का ठोस प्रमाण दिया है।चिकित्सा- विज्ञान में किसी भी व्यक्ति का जीवित रहना का प्रमाण हृदय की धडकन एवं मस्तिष्क की तरंगों से मिलता है। ह्रदय गति बंद हो जाने के पश्चात भी लाइफ-सपोर्ट-सिस्टम पर रख दिया जाता है , जब तक उसकी मस्तिष्क की क्रियाशीलता शून्य नहीं हो जाती है तब तक उसे मृत घोषित नहीं किया जात है।गर्भधान के मात्र 18-25 दिनों में भ्रूण का ह्रदय धड़कने लग जात है, और वह एक जीवित इकाई बन जात है।फिर 40- 45 दिनों में उसके मस्तिष्क की तरंगों को मापा जा सकता है। अतः भ्रूण एक जीवित मानव के सामान है। उसको भी जीवित रहने का पूर्ण अधिकार है।कानून की तरफ से गर्भपात इन कारणों के चलते कराया जा सकता है- - जब गर्भ के कारण जीवन खतरे में हो।
- जब पैदा होने वाले शिशु को मानसिक बीमारी होने की आशंका हो।
- गर्भ बलात्कार के बाद ठहर गया हो |
- गर्भ परिवार नियोजन में विफल होने का कारण हो।
- सामाजिक-आर्थिक स्थिति या वैसी स्थिति, जिससे मां के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़े।
- जब मां किसी शारीरिक या मानसिक बीमारी से ग्रस्त हो या गर्भ के कारण उसके जीवन को खतरा हो या गर्भ उसके शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो।
हिन्दू ग्रंथों में गर्भस्थ भ्रूण को ब्रह्मस्वरूप माना गया है । कहा जाता है की गर्भ में भ्रूण को अपने पिछले सौ जन्मों की स्मृति रहती है । इसलिए भूण हत्या को एक जघन्य अपराध माना गया है । नैतिक, आध्यत्मिक और धार्मिक व्याख्याओं ने अक्सर भ्रूण को लेकर नैतिक जिम्मेदारी का एक जवाबी तर्क उत्पादित किया है। इस दिशा में महिला- आयोग, मानवाधिकार -आयोग इत्यादि संगठनों को कमर -कस का सामने आना होगा। सरकार द्वारा नियंत्रण प्रणाली में सुधार लाना होगा। कृत्रिम उपायों और प्राकृतिक नियंत्रण -प्रणालियों अपना कर और लोगों को अधिक से अधिक जागरूक एवं सम्वेदनशील बना कर इस अमानवीय कृत के प्रति सजग बना होगा। लोगों के सवाल गर्भपात की प्रकृति के बारे में और वह कितना जानबूझकर किया है, इसपर होता हैं। इसमे माँ के इरादे, उद्देश्य और शर्तें शामिल हैं। इस संदर्भ में भारत में Society for the protection of unborn children [SPUC] का गठन किया गया है | इसके केंद्र कई राज्यों में स्थापित हैं जो गर्भपात से मरने वाले अजन्में बच्चों की मूक चीख को आवाज़ देने में जुटे हुए है। उच्चतम न्यायलय ने भ्रूण - हत्या के खिलाफ कड़ाई से पालन करने का आदेश दिया है। भारत में लिंग-अनुपात में निरंतर गिरावट आती जा रही है। स्त्रियों की संख्या निरंतर घटती जा रही है, जिसके कारण कई सामाजिक-सांस्कृतिक समस्याएं उठ खड़ी हुई हैं। बेटी बचाओ कैंपेन इसी दिशा में उठाया गया एक सकारात्मक कदम है ।
कम से कम हम सब इतनी तो इंसानियत रखें ही की इन अजन्में बच्चों की मूक चीख को सुन सके और अपने मानव होने का सबूत दे सके ।द्वारा
गीता झा
The planetary position in a horoscope indicates the nature of disease one would suffer from. Ascendant/lord represents the general build-up and strength of the physical body while the 6th house/lord represents sickness. The lords of ascendant and 6th house are related in any way is the sure sign of sickness or mental/physical sufferings. Lords of ascendant and 6th and a planet combined in any house- Lords of ascendant and 6th combined with Sun in a house, indicates possibility of high fever.
- Lords of ascendant and 6th and Moon join a house; the native may suffer from cholera, dropsy, cold, etc.
- Lords of ascendant and 6th combined with Mars in a house, indicates chickenpox, measles, abscess, injury in a war.
- Lords of ascendant and 6th join Mercury in a house, indicates bile related problems, wind, gastric, digestive system related problems, vomiting etc.
- Lords of ascendant and 6th combined with Jupiter, indicates absence of the disease.
- Lords of ascendant and 6th combined with Venus indicates diseases related to fertility and sex related problems.
- Lords of ascendant and 6th join with Saturn, indicates wind complaints, constipation, gout, asthma etc.
- Lords of ascendant and 6th combined with Rahu/Ketu, indicates head problems, fear of robbery and imprisonment, sudden and undignostic diseases.
Lord of 6th posited in ascendant with a planet- Lord of 6th combined with Mercury in ascendant, indicates venereal diseases.
- Lord of 6th combined with Saturn in ascendant, indicates possibility of surgery of reproductive organs.
- Lord of 6th join Mars in ascendant, indicates boils, abscess, blood related problems.
- Mars related to 6th house/lord indicates possibility of minor/major surgery.
- Jupiter related to 6th house/lord indicates early recovery from the disease.
- Venus related to 6th house/lord indicates diet related problems.
- Saturn is related to 6th house/lord indicates stomach-ache and gastric troubles.
- Lord of 6th combined with a malefic in ascendant, indicates formation of abscess.
Lord of ascendant combined with a planet in 6th/8th/12th house- Lord of ascendant combined with Sun in 6th/8th/12th house, indicates glands formation due to excess heat.
- Lord of ascendant combined with Moon in 6th/8th/12th, indicates gland formation due to fluid retention.
- Lord of ascendant combined with Mars in 6th/8th/12th, indicates gout, boils, abscess, weapon injury etc.
- Lord of ascendant join Mercury in 6th/8th/12th indicates bile complaints.
- Lord of ascendant posited with Jupiter in 6th/8th/12th, indicates mucous formation.
- Lord of ascendant combined with Venus in 6th/8th/12th, indicates tuberculosis.
- Lord of ascendant join Saturn/Rahu/Ketu in 6th/8th/12th, indicates problems from thieves and robbers
Some general combinations: - Saturn and Mars are in trine to each other, indicates wind complaints.
- Saturn posited in 4th, aspected by malefic indicates injury and fear from fire.
BYGEETA JHA [SPIRITUAL HEALER]INDIA